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शिव स्तुति – रुद्राष्टकम (Rudrashtakam)

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शिव स्तुति – रुद्राष्टकम (Rudrashtakam)
Published on March 15, 2026

रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास

रुद्राष्टकम भगवान भगवान शिव की अत्यंत प्रसिद्ध स्तुति है। इसमें 8 श्लोक हैं जिनमें शिव जी की महिमा, करुणा और उनके निराकार स्वरूप का वर्णन किया गया है।

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपम्।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्॥

निराकारमोंकारमूलं तुरीयं
गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम्।
करालं महाकाल कालं कृपालं
गुणागार संसार पारं नतोऽहम्॥

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं
मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम्।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा
लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्।
मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं
प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि॥

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखण्डं अजं भानुकोटि प्रकाशम्।
त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं
भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम्॥

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी।
चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी॥

न यावद् उमानाथ पादारविन्दं
भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम्॥

न जानामि योगं जपं नैव पूजा
नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम्।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो॥

रुद्राष्टकम का फल

  • शिव जी की कृपा प्राप्त होती है
  • मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है
  • भय, दुख और नकारात्मकता दूर होती है
  • विशेष रूप से सोमवार और महाशिवरात्रि के दिन इसका पाठ बहुत शुभ माना जाता है।

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