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शिव चालीसा (Shiv Chalisa)

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शिव चालीसा (Shiv Chalisa)
Published on March 17, 2026

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्या दास तुम, देहु अभय वरदान॥

जय गिरिजा पति दीन दयाला।
सदा करत संतों प्रतिपाला॥

॥ चौपाई ॥

भाल चंद्रमा सोहत नीके।
कानन कुंडल नागफनी के॥

अंग गौर शिर गंग बहाए।
मुंडमाल तन छार लगाए॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे।
छवि को देख नाग मन मोहे॥

मैना मातु की हवे दुलारी।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

नंदी गणेश सोहैं तहँ कैसे।
सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ।
या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥

किया उपद्रव तारक भारी।
देवन सब मिलि तुमहि जुहारी॥

तुरत षडानन आप पठायउ।
लव निमेष महँ मारि गिरायउ॥

आप जलंधर असुर संहारा।
सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।
सबहि कृपा कर लीन्ह बचाई॥

किया तपहिं भागीरथ भारी।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं।
सेवक स्तुति करत सदा ही॥

वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला।
जरत सुरासुर भए विहाला॥

कीन्ह दया तहँ करी सहाई।
नीलकंठ तब नाम कहाई॥

पूजन रामचंद्र जब कीन्हा।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

सहस कमल में हो रहे धारी।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई।
कमल नयन पूजन चहं सोई॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

जय जय जय अनंत अविनाशी।
करत कृपा सब के घटवासी॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।
येहि अवसर मोहि आन उबारो॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।
संकट से मोहि आन उबारो॥

मात पिता भ्राता सब कोई।
संकट में पूछत नहिं कोई॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी।
आय हरहु अब संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदा ही।
जो कोई जाचे सो फल पाही॥

स्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

शंकर हो संकट के नाशन।
मंगल कारण विघ्न विनाशन॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।
नारद शारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमः शिवाय।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

जो यह पाठ करे मन लाई।
ता पर होत है शंभु सहाई॥

ऋणिया जो कोई हो अधिकारी।
पाठ करे सो पावन हारी॥

पुत्रहीन कर इच्छा कोई।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पंडित त्रयोदशी को लावे।
ध्यान पूर्वक होम करावे॥

त्रयोदशी व्रत करे हमेशा।
तन नहीं ताके रहे कलेशा॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥

जन्म जन्म के पाप नसावे।
अंत धाम शिवपुर में पावे॥

॥ दोहा ॥

नित्य नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मन कामना, पूर्ण करो जगदीश॥

यह भी पढ़ें:- शिव स्तुति – रुद्राष्टकम (Rudrashtakam)

शिव चालीसा के लाभ (Benefits):

  • मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
  • संकट और भय दूर होते हैं।
  • भगवान शिव की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

सोमवार या महाशिवरात्रि पर पाठ करने से विशेष फल मिलता है।